किताब

दिल लगाया जिस से भी 
पूरी शिद्दत के साथ लगाया 
दर्द की जंजीर बंधी है, ये मालूम था 
पर इस डर से कदम पीछे ना हटाया 

अरे तुम पर एक किताब लिखता 
ऐसा सोचा था मैंने '.......' 
तुमने तो चार पन्नों में ही 
अपना फ़रेबी रूप सामने ले आया।

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