कुछ लोग बहुत मासूम हैं
हलके में बोलकर इक बात को उन्होंने पर्दा कर दिया, क्या पता था के किसी के दिल पे घाव कर दिया | ये चोट दर्द देती है पर शोर कुछ करती नहीं, आज इक आवाज़ ने बस इस दिल को कांच कर दिया | ये कोई मुश्किल खेल नहीं बस चंद लफ़्ज़ों का धोखा था, वो बोले भी "उनको" जब न तो कोई मौका था | अंजाम इसका क्या होगा ये उन्होंने न सोचा था, आज फिर एक बार इस ज़ुबान को न किसी ने रोक था | इस छोटी सी ज़िन्दगी में 'राहुल' ये तूने जान लिया, इस बोली के भिन्न रंगों को तूने कुछ यूँ पहचान लिया | मीठा बोलो, प्यार से बोलो और याद रखो इस बात को, के ज़िन्दगी की इस दौड़ में कुछ लोग बहुत मासूम हैं |