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Showing posts from October, 2016

कुछ लोग बहुत मासूम हैं

हलके में बोलकर इक बात को उन्होंने पर्दा कर दिया, क्या पता था के किसी के दिल पे घाव कर दिया | ये चोट दर्द देती है पर शोर कुछ करती नहीं, आज इक आवाज़ ने बस इस दिल को कांच कर दिया | ये कोई मुश्किल खेल नहीं बस चंद लफ़्ज़ों का धोखा था, वो बोले भी "उनको" जब न तो कोई मौका था | अंजाम इसका क्या होगा ये उन्होंने न सोचा था, आज फिर एक बार इस ज़ुबान को न किसी ने रोक था | इस छोटी सी ज़िन्दगी में 'राहुल' ये तूने जान लिया, इस बोली के भिन्न रंगों को तूने कुछ यूँ पहचान लिया | मीठा बोलो, प्यार से बोलो और याद रखो इस बात को, के ज़िन्दगी की इस दौड़ में कुछ लोग बहुत मासूम हैं |

आजादी

आये वो, बन कर एक फरिश्ता, छोटी सी ज़िंदगी मे, मिला एक प्यारा सा रिश्ता, कहते थे वो, के दिलों पे राज करते हैं.... इस दिल पे किया तो एहसास हुया, के,  . अँग्रेज़ भी भारत पर राज ही करते थे.... -Rahul

When she was gone

And this thought came, When she was gone, Those feelings, Those moments, Everything was getting faded, In that time's smoke And in a moment, Those years passed. Not any ray of light, I could see in that smoke But I was still there, Sitting on a table of two, Ordering two coffees Having a fake smile Realizing that, The time, Was actually good, When she was around. The reason? Me? Not consummative love? These thoughts, Spinning and teasing, Around my mind, Appeased by every sip and glare Of 'that' coffee But all, When she was gone When she was gone... -Rahul