कुछ लोग बहुत मासूम हैं

हलके में बोलकर इक बात को
उन्होंने पर्दा कर दिया,
क्या पता था के किसी के
दिल पे घाव कर दिया |

ये चोट दर्द देती है पर
शोर कुछ करती नहीं,
आज इक आवाज़ ने बस
इस दिल को कांच कर दिया |

ये कोई मुश्किल खेल नहीं
बस चंद लफ़्ज़ों का धोखा था,
वो बोले भी "उनको"
जब न तो कोई मौका था |

अंजाम इसका क्या होगा
ये उन्होंने न सोचा था,
आज फिर एक बार इस ज़ुबान को
न किसी ने रोक था |

इस छोटी सी ज़िन्दगी में
'राहुल' ये तूने जान लिया,
इस बोली के भिन्न रंगों को
तूने कुछ यूँ पहचान लिया |

मीठा बोलो, प्यार से बोलो
और याद रखो इस बात को,
के ज़िन्दगी की इस दौड़ में
कुछ लोग बहुत मासूम हैं |

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