आज फिर कुछ लिखने का मन किया
आज फिर कुछ लिखने का मन किया, उठाई डायरी - कलम, और सोचना शुरू किया, मन में विचार बहुत भरे थे, पर बयान करने को शब्द नहीं, टूट चूका था ये दिल, फिर जुड़ने की हिम्मत नहीं, तो आज दिल से नहीं, कुछ दिमाग से लिखने का प्रयास किया, आज फिर कुछ लिखने को मन किया। सोचा, दिल और दिमाग की दौड़ में, आज दिल, क्यों पिछड़ रहा है, मेरा दिमाग, कुछ लिखने को कह रहा है समझ नहीं आता, अब क्या लिखूं, आज तो बस यूँ ही, कलम चलाने का मन किया । बहुत कुछ कहना चाहता है ये दिल पर शायद, डर गया है अब ये इस ज़िन्दगी की ज़ंजीरों में, बंध गया है अब ये, अब इस दिल को आज़ाद करवाना है, ये कर्तव्य इस दिमाग को ही तो निभाना है, शायद इसलिए, आज राहुल ने ये कदम लिया, कविता अपनी दिल से नहीं, दिमाग से लिखने का निर्णय लिया । आज फिर कुछ लिखने का मन किया।।।।