Understanding LIFE

इस भाग दौड़ की ज़िंदगी में,
मैं रोज विचार बदल रहा हूं।

उस रोज़,
जब मैं परेशान था,
तो गम के सिरहाने, तनहाई के आंचल में बैठ,
आंसुओं की बारिश में भीगते हुए,
मैं,
वो हर एक दिन, हर एक पल,
को कोस रहा था जिसने मुझे,
अकेलेपन का एहसास दिलाया।

परंतु,

वहीं इक रोज़,
खुशीयों के आंगन में, हंसी के सिरहाने,
ख्वाबों के आंचल में बैठ,
चेहरे पर मुस्कुराहट लिए,
मैं,
ज़िंदगी के उन हसीन लम्हों को भी,
याद कर रहा था,
जिन्होंने मुझे खुशियों के इस सागर से परिचित कराया।

अब इसे समय का खेल कहो या मेरी नादानी,
पर समय के इसी खेल में,
जिंदगी को समझने की कोशिश कर रहा हूं मैं,
शायद इसीलिए हर रोज़,
विचार बदल रहा हूं मैं।

- Rahul Garg

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