एक इंसान (A Person)

एक इंसान ज़िन्दगी बदल देता है,
वह ज़िन्दगी संवार देता है,
कभी बिगाड़ देता है,
कभी असर नहीं होता,
तो कभी वही इंसान बन जाता है ।
कभी हम नहीं सुनते उसकी,
तो कभी उसकी बातें कानों में गूंजती हैं,
कभी साथ देता है वो,
तो कभी अकेला सा कर जाता है,
वह है हर एक इंसान,
कभी मिलना चाहते हैं हम उस से
तो कभी न चाहकर भी ये ज़माना उस से मिलवाता है,
जिसके लिए हम एक अन्य इंसान हैं,
और वही इंसान, इस इंसान को एक नया इंसान बना जाता है ।
ये केसा अजीब खेल है कुदरत का,
न कोई जान पाता है,
और न कोई समझ पाता है।

- Rahul Garg

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