एक और लिख लूं सोचा शायद ये गम कम हो जाए तेरे इंतजार में जो वक्त थमा था वो शायद वापस वक्त हो जाए । तुझे चाहा है खुद से भी ज्यादा, इसको कहूं या लिखूं तेरे तक कोई यह बात ही पहुंचा दे, इतना तरस तो खुदा मुझ पर खाए । भरे मां के दरबार में तेरी दुआ की थी तुझे बता कर, तुझे याद है? एक तथास्तु तो मां, मेरी दुआ को भी दे दिया जाए । गमगीन सा है सब तेरे बिना यहां, सब जगह मायूसी सी छाई है तुझे कोई और शहर रास आ जाए, तो ए खुदा इस बस्ती में आग लग जाए । मैं टूट चुका हूं, मैं हार चुका हूं, पर एक उम्मीद अब भी बाकी है अब भी एक दफा तू पलट कर देख ले, तो ये जलती हुई बस्ती भी, लंका हो जाए । - राहुल
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Tera gum
Ye jo hum likhe ja rahe hain Bas tere diye gum hain Jinhen hum piye ja rahe hain Kuch baaten bolni thin tumse Jaane se pehle Unhen bas ab zehan me dafan kiye ja rahe hain Tumhe hmara nahi hona tha to na sahi Tanik bol dete ik baar par ab tumhari vo khamoshi hi hai Jise hum bhulane ki koshish kiye ja rahe hain Aisa nahi ke koi aur mila nahi Ishq bhi huya, dil bhi toota aur aage bhi badhe lekin na jane kyun jo ghav tere diye huye hain unka marham aj bhi dhoonde ja rahe hain
समन्दर
दूर से ताक रहे थे हम समन्दर को नजाने क्यों वो पास आ गया हम यहीं ठीक ही तो थे नजाने क्यों वो पास बुला गया कुछ कदम बढ़ा के हम आगे चले गए फिर नजाने क्यों वो दूर भाग गया अब मैं वहीं रुकूं लहर के इंतज़ार में या नहीं नजाने क्यों ये सवाल मुझे अंदर से खा गया ए 'राहुल ' शायद तेरी गलती ही थी तू समन्दर की फितरत पहचानने में धोखा खा गया
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