कुछ कहना चाहता हूँ

कुछ कहना चाहता हूँ तुमसे
पर समय का बंधा हूँ मैं

याद है वो घड़ी जो तुमने दी थी
बहुत खुश था मैं
पर महसूस नहीं किया था के शायद
उसी घड़ी की सुईयों में
मैं यूँ उलझ के रह जाऊंगा

अब जब तुम नहीं हो
तो कभी कभी मैं
तन्हाई के इस आलम में
तुम्हे याद कर
सोचता हूँ
काश वो घड़ी की जगह उस दिन
कुछ वक़्त दे दिया होता|

कुछ कहना था तुमसे
कुछ कहना है तुमसे

बस थोड़ी दे ही सही
पर रुक जाओ
मेरे लिए
शायद ये कंपकपाती हुयी ज़ुबान
तेज़ी से धड़कता दिल
और हज़ारों बातों से घिरा दिमाग
एक पल के लिए रुक जाये

और मैं शायद कुछ कह पाऊं
हर बार की तरह
इन अकेली रातों में
तुम्हारी यादों के सहारे
अपने तकिये के नीचे औंधे मुँह घंटों रोने के बाद
कलम उठाकर नहीं

तुम्हारे समक्ष बैठकर
तुम्हारी आँखों में डूबते हुए
और इस दिल की सुनते हुए
इस बार
शायद मैं वो बात कह पाऊं
थोड़ी देर
बस थोड़ी देर और
रुक जाओ,
कुछ कहना चाहता हूँ तुमसे |

- Rahul Garg

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