बचपन की याद
वो पानी में तराई कश्ती,
अब वापस नहीं आती|
वो पक्षियों की आवाज़,
अब और नहीं भाती ||
वो पक्षियों की आवाज़,
अब और नहीं भाती ||
कूद जाते थे जिस दिवार को लांघ कर,
आज वो दिवार कहीं नज़र नहीं आती ||
जिन रंगों से बनाते थे विभिन्न चित्र,
आज वो रंगीन कला बस किताबों में है आती ||
आज वो दिवार कहीं नज़र नहीं आती ||
जिन रंगों से बनाते थे विभिन्न चित्र,
आज वो रंगीन कला बस किताबों में है आती ||
वो पहली साइकिल का आनंद,
वो पहली चोट का दर्द,
वो पहले बैट का रन,
वो पहले मैच की हार,
वो गलियों के खेल,
वो हंसी की बौछार,
अब तो बस इनकी याद ही है आती ||
वो पहली चोट का दर्द,
वो पहले बैट का रन,
वो पहले मैच की हार,
वो गलियों के खेल,
वो हंसी की बौछार,
अब तो बस इनकी याद ही है आती ||
हे भगवान! कुछ वापिस दे सको,
तो देना मेरा बचपन,
क्योंकि बड़े होने की सोच अब और नहीं आती ||
तो देना मेरा बचपन,
क्योंकि बड़े होने की सोच अब और नहीं आती ||
बेइन्तहां मोहब्बत हो गयी थी उस बचपन से,
सच कहते हैं लोग के पहली मोहब्बत रास नहीं आती|
सच कहते हैं लोग के पहली मोहब्बत रास नहीं आती|
-Rahul Garg
kya baat
ReplyDeleteThanks :)
Deleteek baar fir tarif karta hun... aapne jabar likha hai
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